शर्मनाक :प्लाज्मा दान करने के कथन के साथ, तब्लिगियों को महिमंडित किया गया

जब देश दुनिया के लोग कोरोनावायरस से बचाव के लिए जारी किए गए नियमों का पालन कर रहे थे उस वक्त इस्लाम से संबंध रखने वाली तबलीगी जमात धड़ल्ले से नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए कार्यक्रम आयोजित कर रही थी. जांच में पाया गया कि इस कार्यक्रम में तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद द्वारा कोरोनावायरस फैलाने के बयान जारी किया गए थे. मौलाना साद ने यह भी कहा कि अगर मौत आ भी जाती है तो क्या बड़ी बात है.

तबलीगी जमात से संबंधित अनेकों अपराधिक कार्य के सामने आए जैसे नर्सों के कपड़े फाड़ना और डॉक्टरों पर थूकना इत्यादि और इसके बाद भरपूर विरोध शुरू हो गया. ऐसे में तबलीगी जमात और इस्लामिक आईटी सेल से संबंधित लोगों ने तबलीगी जमात का बचाव करने के लिए उन्होंने हवा बनाई की तबलीगी जमात का विरोध यानी कि मुसलमान का विरोध करना है. ताकि इसकी आड़ में तबलीगी जमात के पूरे कामों को छुपाया जा सके.

मात्र एक विचार को असली खबर के रूप में पेश किया

हाल ही में अपनी मूर्खता की वजह से कोरोना वायरस संक्रमित हुए तबलीगी जमात के लोग सरकार के द्वारा प्रदान किए गए मुफ्त इलाज की सुविधाओं का इस्तेमाल करके स्वस्थ हो गए हैं तो उन्होंने निर्णय किया कि दूसरे मुस्लिमों की मदद करने के लिए प्लाजमा दे दिया जाए. एनडीटीवी और इंडियन एक्सप्रेस जैसे कुछ कांग्रेस समर्थित वेब पोर्टल के द्वारा इस रुझान और विचार को असली खबर के रूप में फैलाया गया.

इस्लाम में शरीर का कोई भी हिस्सा दान करना हराम माना जाता है, यदि जरूरत पड़ने पर मुस्लिम अंग या खून दान करता भी है तो केवल किसी दुसरे मुस्लिम के लिए. फिर भी इस रुझान को असली खबर के रूप में पेश करते हुए इस्लामिक समर्थक लोगों ने तबलीगी लोगों का महिमामंडन करना शुरू कर दिया. परंतु एजेंडा चलाने वालों ने इसे परोपकार की बड़ी मिसाल साबित करके तबलीगी जमात के पुराने अपराधियों को दबाने की कोशिश करना शुरू कर दिया.

इतना ही नहीं इस नकली खबर को फैलाने में बड़े-बड़े पत्रकारों ने भी योगदान दे दिया. हालांकि उन्होंने साफ-साफ लिख रखा था कि यह मात्र उनका एक विचार है कि वह प्लाज्मा दान करेंगे.

एजेंडे को मजबूत करने के लिए कोरोना का इलाज करवा रहे एक मरीज की फोटो बार-बार गलत दावे के साथ साझा की जाती रही है.

इस एजेंडे को इतना आगे बढ़ाया गया कि सोशल मीडिया पर तबलीगी हीरो और हमें तबलीगी ऊपर गर्व है जैसे ट्रेंड इस्लामिक समर्थकों के द्वारा चलाए गए. ट्रेंड कराने वालों की मानसिकता कुछ ऐसी है कि अगर आईएसआईएस आतंकवादी संगठन के लोग आपस में एक दूसरे आतंकवादी की मदद करने के लिए ब्लड डोनेशन करने तो इन जैसे लोगों के द्वारा उन लोगों को मानवतावादी साबित कर दिया जाएगा.

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