भक्त और चमचे में फर्क

सोशल मीडिया पर मैंने कई पोस्ट को पढ़ा, अनेकों नेताओं और उनके समर्थकों के द्वारा की जाने वाली बयानबाजी पर ध्यान दिया और उसका ठीक से विश्लेषण किया. वह सभी बयान वह सभी लेख पड़े जिनमें एक वर्ग को भक्त कहकर संबोधित किया जाता था और दूसरे वर्ग को चमचा कहकर संबोधित किया जाता था. सभी के विश्लेषण के बाद में एक निष्कर्ष पर पहुंचा और मैंने भक्त और चमचे के बीच का एक बड़ा अंतर निकाला. आज के इस लेख में भक्त और चमचे में अंतर बताऊंगा.

खासतौर से भक्त और चमचे वाली संबोधन तब आते हैं जब भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी के समर्थकों के बीच में बहस हो रही होती है. लेकिन इनमें एक चीज बहुत ही महत्वपूर्ण होती है कांग्रेसियों के द्वारा भक्त केवल उस बीजेपी समर्थक व्यक्ति को कहा जाता है जो हिंदू धर्म का हो. यानी कि यहां पर कुल मिलाकर हिंदू धर्म के पवित्र शब्द भक्त को गाली के रूप में परिभाषित करने की कोशिश की जाती है. और यह काम करने में कांग्रेस के सपा बसपा और अन्य अनेकों राजनीतिक पार्टियों के लोग शामिल है. बीजेपी और हिंदुओं की तरफ से पलटवार करते हुए इन लोगों को चमचा कहा जाता है. यहां पर एक अच्छी बात देखने को मिलती है कि बीजेपी के समर्थक धार्मिक रूप से हमला नहीं करते. वरना वह भी बदले में कांग्रेस के मुस्लिम समर्थकों को नमाजी कह कर गाली दे सकते हैं.

खैर यह तो हो गई वह बात की किस प्रकार भक्तों और चमचे का उपयोग किया जा रहा है. परंतु देखने वाली बात यह है कि भक्त किन लोगों को कहा जाता है. अनेकों टिप्पणियां अनेकों बयानों को देखने के बाद मैंने एक चीज उन सभी बयानों में एक जैसी पाई जिनमें कुछ लोगों को भक्त कहा गया. जिन लोगों को भक्त कहा जा रहा था या तो वह राष्ट्रवाद की बात कर रहे थे, कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानते हैं. या फिर सभी जातियों में एकता की बात करके हिंदू एकता की बात कर रहे थे क्षेत्र में कार्य करने के लिए भारतीय जनता पार्टी तथा मोदी का समर्थन करते हैं. इन लोगों को कांग्रेस के तथा बीजेपी विरोधी पार्टियों के द्वारा भक्त कहा गया, कई बार तो अंधभक्त भी कहा गया.

वहीं दूसरी ओर जो लोग कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं मानते हैं कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग करते हैं हिंदू एकता का विरोध करते हैं और जातिवाद को बढ़ावा देने का काम करते हैं तथा जातियों को टारगेट करके राजनीति करते हैं इतना ही नहीं कांग्रेस के परिवारवाद का समर्थन करते हैं और चापलूसी करते हैं. ऐसे लोगों को बीजेपी समर्थकों की तरफ से चमचा कहा जाता है.

इन दोनों बातों से एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आया, ” भक्त वह व्यक्ति होता है जो राष्ट्रहित और समाज हित के लिए अपने रोल मॉडल का पूर्ण समर्थन करता है उसे अपने रोल मॉडल में अटूट श्रद्धा होती है. वहीं दूसरी ओर चमचे के मन में कोई श्रद्धा नहीं होती, चमचों का अपना अलग एजेंडा होता है वह अपने हित के लिए किसी भी पार्टी के किसी भी नेता का समर्थन करने लग जाते हैं. यही वह नेता कितना भी भ्रष्टाचारी हो या फिर कितना ही मूर्ख हो. यदि चमचों को उससे लाभ मिल रहा है तो फिर वह उसका समर्थन अवश्य करेंगे.”

तो बेशक इस लेख के माध्यम से आपको चमचे और भक्त के बीच का अंतर समझ में आ गया होगा.

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